लाचार बाह्मण परिवार की मदद के वादो को सालों से निभा रही हैं ‘आवाज एक पहल’

समाज की सेवा करना तपस्या करने के सामान होता है । व्यक्ति या संस्था को तन-मन-धन समर्पण के साथ वचनबद्धता एवं प्रतिबद्धता दिखानी पड़ती है । अमूमन लोग एक दो बार किसी का मदद करके अपना कदम पिछे खिच लेते हैं। पर आवाज़ एक पहल मिशाल है ।दो साल पहले जब एक गरीब ब्राह्मण परिवार पर जिविका की संकट आन पड़ी थी तब संस्था ने हर घड़ी साथ निभाने का वादा किया था।जब पांच दुधमुंही बच्चियों को अकेला छोड़कर पिता स्वर्गवासी हो गये थे तब संस्था ने आगे बढ़कर जिने की उम्मिद जगायी थी । महिनों बित गये और यह उम्मिद की डोर सलामत हैं। बच्चों की पढ़ाई, होली की मिठाई , घर का राशन-पानी , सबकी दवाई , संस्था हर वक्त साथ निभाती हैं ।ईस बार संत टैरैसा इंटरनेशनल स्कूल के डायरेक्टर गौरव जी ने जिम्मेदारी निभाई और तब जाकर मासुमो की होली मनी।

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