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किसान मजदूरों के साथ अपना जन्मदिन मनाएंगे लव कुश

कल यानी 5 जून को सामाजिक कार्यकर्ता लव कुश का जन्मदिन है। आवाज एक पहल और इसके किसान विंग राष्ट्रीय किसान विकास संघ के संचालक लव कुश का कहना है की इस बार वो अपना जन्मदिन किसान मजदूरों के बड़ी सादगी पूर्वक मनाएंगे। उन्होंने बताया की उनकी संस्था ने बिहार के किसानों का कायाकल्प का बीड़ा उठाया है अतः इस यादगार मौके को भी वे किसानों के समीप रहकर ही मनाना चाहते हैं। बताते चलें की आवाज एक पहल एक सामाजिक संस्था है जो अनेक तरह के सामाजिक कार्यों के साथ साथ किसानों के बेहतरी के लिए किए जाने वाले प्रयासों के लिए जानी जाती है।

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औरंगाबाद के मुकेश मौआर ने डेयरी फार्मिंग में कायम की मिसाल

औरंगाबाद के रहनीहार हैं मुकेश मौआर जी । डेयरी फार्मिंग करते हैं। वैसे डेयरी फार्मिंग भी बड़ा कमाल का सेक्टर हैं ।

प्रोपर ट्रेन्ड , मैनेजमेंट और मार्केटिंग के बारीकियों को समझने वाला मुकेश मौआर टाईप बंदा तो आसमां को छुता हैं । वही मौआर जी जैसों का मोटिवेशनल स्टोरी सुन फटाक से डेयरी शुरू करने वालो का दुर्गति भी जगजाहिर है। बड़ा समर्पण का चीज है भाई डेयरी फार्मिंग। और महुआर जी समर्पित हैं भी । दिन रात एक किए रहते हैं । एक बात और जान लीजिए ईन्होने बीकॉम की पढ़ाई की हुई है। 13 वर्ष तक शिपिंग कंपनी में जॉब भी किया। उसके बाद गांव की मिट्टी ने ईनपर नजर गड़ा दी। गांव आए ।डेयरी फार्मिंग शुरू की ।लोगों के मजाक के पात्र बने। ट्रेनिंग नहीं लिया था सो नुकसान हुआ ।आज सबको बताते चलते हैं कि बिना ट्रेनिंग डेयरी फार्मिंग ना बाबा ना। अब मुकेश जी की गिनती औरंगाबाद के सबसे सफल डेरी फार्मरों में की जाती है। हो भी क्यों ना । 40 🐄 हैं । रोजाना 300 लीटर दूध उत्पादन होता हैं। कुछेक डेढ़ दो सौ कस्टमर है। अच्छा कमाते हैं और गर्व से बताते हैं कि डेयरी फार्मिंग से बेहतर व्यवसाय इस धरती पर कुछ नहीं है। मौआर जी ने आधुनिक शेड का निर्माण कराया हैं । गायों की संख्या 100 तक पहुंचाना चाहते हैं। उम्मीद है सफल होंगे और हमारी कामना भी है कि ईन जैसे सभी किसान सफल हो।

राष्ट्रीय किसान विकास संघ का किसान जन जागरण यात्रा जारी है। यह यात्रा तब तक जारी रहेगी जब तक लोगों को खेती में अवसर दिखने लगे । फायदा नजर आने लगे और लोग गांव की तरफ लौटने लगे।

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संत टैरैसा के बच्चे वन देवी मे पहुंचे पुजा अर्चना के साथ जानी पुरातन हिन्दू संस्कृति को।

मंदिर हमारी संस्कृति और परंपरा का एक बड़ा हिस्सा हैं। जीवन में हर त्योहार, अवसर या बड़ी से बड़ी उपलब्धी पहले मंदिर में जाकर मनाया जाता है! बुजुर्गों के अनुसार, मंदिरों का दौरा करने का अर्थ सर्वशक्तिमान से आशीर्वाद प्राप्त करना, हमारे दिमाग को शांत करना और एक नया दृष्टिकोण प्राप्त करना है।
साप्ताहिक जूनियर स्कूल गतिविधि के एक भाग के रूप में 12 अप्रैल 2019 को हमारी nursery ,lkg तथा Ukg ने कंचनपुर, बिहटा में वनदेवी मंदिर का दौरा किया। छात्रों के साथ उनके शिक्षक और सहायक कर्मचारी भी थे। वे मंदिर अपने स्कूल वैन के द्वारा गये तथा अपना पूरा दिन मंदिर के शांत और निर्मल वातावरण में व्यतीत किया। वहाँ स्वादिष्ट प्रसाद भी परोसा गया जिसे युवा भक्तों ने अत्यधिक पसंद किया। इसके बाद, छात्रों को उस क्षेत्र में ले जाया गया जहाँ मूर्तियों की पूजा की जाती है।यह यात्रा कक्षा से परे सीखने का एक उपयुक्त उदाहरण था।

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गांव, किसान, जल और जमीन का महापर्व छठ की महानता जान हैरान रह जाएंगे आप।

ग्रामीण जीवन का यह सबसे बड़ा पर्व माना गया है। इसके केन्द्र में कृषि, मिट्टी और किसान हैं। धरती से उपजी हुई हर फसल और हर फल-सब्जी इसका प्रसाद है। मिट्टी से बने चूल्हे पर और मिट्टी के बर्तन में नहाय-खाय, खरना और पूजा का हर प्रसाद बनाया जाता है। बांस से बने सूप में पूजन सामग्री रखकर अर्घ्य दिया जाता है। एक जगह का सामान दूसरी जगह भेजा जाता है। इस संबंध में एक गीत है….
पटना के घाट पर नारियर किनबे जरूर
हाजीपुर से केरवा मंगाई के अरघ देबे जरूर
हियरा के करबो रे कंचन
पांच पुतर, अन-धन, लक्ष्मी मंगबे जरूर…..।जल ही जीवन है…
प्रदूषण के खतरों से बचाती है छठ
आज पूरी दुनिया में जल और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। बिहार ने सदियों पूर्व इसके महत्व को समझा और यही कारण है कि छठ पर्व पर नदी घाटों और जलाशयों की सफाई की जाती है तथा जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। सूर्य की छाया पानी में साफ-साफ दिखाई पड़नी चाहिए। संदेश साफ है कि जल को इतना निर्मल और स्वच्छ बनाइए कि उसमें सूर्य की किरणें भी प्रतिबिंबित हो उठे। मौजूदा दौर में जल प्रदूषण प्राणियों के जीवन के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है।छठ सूर्य की पराबैगनी किरणों को अवशोषित कर उसके हानिकारक प्रभावों से बचाती है। वैज्ञानिक भी यह मानते हैं कि कार्तिक मास की षष्ठी तिथि को धरती की सतह पर सूर्य की हानिकारक पराबैगनी किरणें मानक से अधिक मात्रा में टकराती हैं। लोग जल में खड़े होकर जब सूर्य को अर्घ्य देते हैं तो वे किरणें अवशोषित होकर आक्सीजन में परिणत हो जाती हैं, जिससे लोग उन किरणों के कुप्रभावों से बचते हैं। तभी तो प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा हो पाती है और हम चुस्त-दुरुस्त दिखते हैं।ग्रामीण जीवन का यह सबसे बड़ा पर्व माना गया है। इसके केन्द्र में कृषि, मिट्टी और किसान हैं। धरती से उपजी हुई हर फसल और हर फल-सब्जी इसका प्रसाद है। मिट्टी से बने चूल्हे पर और मिट्टी के बर्तन में नहाय-खाय, खरना और पूजा का हर प्रसाद बनाया जाता है। बांस से बने सूप में पूजन सामग्री रखकर अर्घ्य दिया जाता है। एक जगह का सामान दूसरी जगह भेजा जाता है। इस संबंध में एक गीत है….
पटना के घाट पर नारियर किनबे जरूर
हाजीपुर से केरवा मंगाई के अरघ देबे जरूर
हियरा के करबो रे कंचन
पांच पुतर, अन-धन, लक्ष्मी मंगबे जरूर…..।छठ सूर्य की पराबैगनी किरणों को अवशोषित कर उसके हानिकारक प्रभावों से बचाती है। वैज्ञानिक भी यह मानते हैं कि कार्तिक मास की षष्ठी तिथि को धरती की सतह पर सूर्य की हानिकारक पराबैगनी किरणें मानक से अधिक मात्रा में टकराती हैं। लोग जल में खड़े होकर जब सूर्य को अर्घ्य देते हैं तो वे किरणें अवशोषित होकर आक्सीजन में परिणत हो जाती हैं, जिससे लोग उन किरणों के कुप्रभावों से बचते हैं। तभी तो प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा हो पाती है और हम चुस्त-दुरुस्त दिखते हैं।

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बिहटा में टैलेंटेड बच्चे सम्मानित।

आर के साइंस टिटोरियल के बच्चों ने परचम लहराया
बिहटा: आज गुलटेरा बाजार स्थित आर के साइंस टिटोरियल कोचिंग में सी.सी.एस के मुख्य अतिथि प्रेम रंजन सर के द्वारा मैट्रिक में उत्तिर्ण बच्चों को सम्मानित किया गया जिसमें कोचिंग के कुमारी खुशी रितिक आन्नद शिवानी कुमारी सहित उनके अभिभावक को भी सम्मान मिला! डा़यरेक्टर रवि कुमार ने बताया कि हमारे संस्था के बच्चे हमेशा परचम लहराये ताकि उन बच्चों के साथ हमारा कोचिंग का नाम उच्चा हो वहीं प्रेम रंजन जी ने बताया कि आज बच्चें हर जगह पर अच्छा कर रहे है और सरकार भी इसके लिए बेहतर करने का प्रयास कर रहा है हमें लाभ उठाकर देश का नाम रौशन करें! वही मशहूर उद्घोषक रौशन सिंह ने अपने शब्दो से सभी को खुब हंसाया तथा कविता पढ़कर शिच्छा को बढ़ाने का संदेश दिया!समय पर कोचिंग डायरेक्टर रवि कुमार प्रमोद पाण्डेय प्रेमजीत सर अमहारा से दिपक जी धन्नजय सर सहित अभिभावक उपस्थित थे!