ठहाकों के बिच बच्चों ने सिखा जिंदगी का ककहरा।

अगर पढाई में साईकल चलाने जितना आनंद आता तो जिदंगी का सफर को मंजिल तक पहुंचने में देर नहीं लगती।गिरना,उठना और संभलकर आगे बढ़ जाना साईकल यही तो सिखाता है हमें।ईसांन जिवन में ईसी सुत्र वाक्य को लेकर आगे बढे तो उसको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। राकेश शांडिल्य के ईन जोशिले शब्दबाण ने बच्चों में जान डाल दी और सभागार तालियों से गूंज उठा।मौका था द ब्लु बेल्स इंटरनेशनल स्कूल अख्यतियारपुर द्वारा आयोजित मोटिवेशनल सेमिनार का जिसमें बिहार के नंबर वन मोटिवेटर राकेश शांडिल्य शिरकत कर रहे थे । अपने सहज अंदाज व सरल शब्दों का उन्होंने ऐसा ताना बाना बुना की सामने बैठे स्कुली बच्चे मंत्रमुग्ध हो गए। राकेश शांडिल्य ने छोटे छोटे कहानियों, उद्धरणों के इस्तेमाल करके बच्चों के हर समस्याओं का समाधान बताया। समय प्रबंधन, रूटिन मेकिंग व प्रेशर हैडल करने के अनेकानेक तरीकों से उन्होंने बच्चों को अवगत कराया। इससे पहले स्कुल प्रबंधन ने शांडिल्य का स्वागत किया। मौके पर स्कुल के डायरेक्टर लवकुश शर्मा, विरु,एके सिंह व आस पड़ोस के सैकड़ों बच्चे उपस्थित थे।

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