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लड़की से छेड़छाड़ कर रहा था लड़का, लड़की रुकी और बरसाना शुरू कर दिए थप्पड़

नई दिल्ली: पश्चिम दिल्ली में एक महिला ने लड़के का कॉलर पड़ा और खूब थप्पड़ जड़ दिए. उसके बाद वो उसे घसीटते हुए पुलिस स्टेशन ले गई. ये इसलिए किया क्योंकि लड़के ने अश्लील टिप्पणी की थी. ये घटना 25 फरवरी की है. जब लड़की अपने दोस्त के साथ करोल बाग के गफ्फार मार्केट में निकल रहे थी तो 5 लड़कों का ग्रुप छेड़छाड़ करने लगा.

कैमरे के सामने दो न्यूज एंकर्स के बीच हुआ झगड़ा, वीडियो हुआ LEAK

जिसके बाद लड़के लड़की का पीछा करने लगे. लड़की ने बचने के लिए साइकल रिक्शा ले लिया. लड़के फिर भी नहीं रुके और रिक्शे का पीछा करने लग गई. भीड़ होने की वजह से रिक्शा भी काफी धीरे चल रहा था. जिसके बाद लड़की उतरी और लड़के पर थप्पड़ बरसाना शुरू कर दिया. जिसके बाद भीड़ गई और लड़की लड़के को पुलिस स्टेशन ले गई और शिकायत दर्ज करा दी.

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बच्चे ने लिफ्ट में की ऐसी शर्मनाक हरकत, उसके बाद जो हुआ वो काफी खतरनाक था

पुलिस ने दो लड़को को अरेस्ट कर लिया है, जिनका नाम मनीष और अभिषेक बताया जा रहा है. जो हरियाणा के चखरी ददरी के बताए जा रहे हैं. जो दिल्ली से 100 किलोमीटर दूर है. 2017 दिल्ली पुलिस डाटा के मुताबिक, एक दिन में 5 से ज्यादा रेप केस रिपोर्ट होते हैं.

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25 साल की Avani Chaturvedi बनीं भारत की पहली मह‍िला पायलट, चेस खेलने-पेंट‍िंग करने का है शौक

अवनी चतुर्वेदी ने जामनगर एयरबेस पर अकेले ही करीब 30 मिनट तक MiG-21 विमान उड़ाया।

25 साल की Avani Chaturvedi बनीं भारत की पहली मह‍िला पायलट, चेस खेलने-पेंट‍िंग करने का है शौक 

Avani Chaturvedi

नई द‍िल्‍ली. इंडियन एयरफोर्स की फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी फाइटर प्लेन अकेले उड़ाने वाली देश की पहली महिला फाइटर पायलट बन गई हैं। मध्‍य प्रदेश के रीवा जिले से ताल्‍लुक रखने वाली अवनी ने शायद ही कभी सोचा था कि वह एक दिन इतिहास रच देंगी और अकेले फाइटर प्लेन उड़ाने वाली पहली महिला फाइटर पायलट बन जाएंगी, लेकिन उन्‍होंने ऐसा कर दिखाया, जब सोमवार को उन्‍होंने गुजरात के जामनगर एयरबेस पर अकेले ही करीब 30 मिनट तक MiG-21 विमान उड़ाया।

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अवनी का जन्म 27 अक्टूबर 1993 को हुआ था। उनके पिता श्री दिनकर चतुर्वेदी मध्य प्रदेश सरकार के वाटर रिसोर्स डिपार्टमेंट में एक एग्जिक्युटिव इंजीनियर हैं और उनकी मां एक घरेलू महिला हैं। अवनी के बड़े भाई भी एक आर्मी ऑफिसर हैं। अक्टूबर 2015 में सरकार ने महिलाओं के फाइटर पायलट बनने की राह प्रशस्त कर दी थी। महिला फाइटर पायलट बनने के लिए 2016 में पहली बार तीन महिलाओं अवनि चतुर्वेदी, मोहना सिंह और भावना को वायु सेना में कमिशन किया गया था।

अवनी की स्कूली शिक्षा मध्य प्रदेश के शाहदोल जिले के एक छोटे से कस्बे देउलंद में हुई। 2014 में उन्होंने राजस्थान की बनस्थली यूनिवर्सिटी से उन्होंने टेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन एयरफोर्स का एग्जाम पास किया। मिग-21 ‘बाइसन’ की दुनिया में सबसे ज्यादा लैंडिंग और टेक-ऑफ स्पीड है।

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अवनी मध्य प्रदेश के रेवा जिले से हैं। 25 साल की अवनी ने अपनी ट्रेनिंग हैदराबाद एयर फोर्स अकेडमी में पूरी की। फाइटर प्लेन को अकेले उड़ाना पूर्णरूप से फाइटर पायलट बनने की दिशा में पहला कदम है। अकेले फाइटर प्लेन उड़ाने से पहले सोमवार सुबह उनके प्रशिक्षक ने मिग-21 बाइसन एयरक्राफ्ट की जांच की।

उड़ान के दौरान अनुभवी फ्लायर्स और प्रशिक्षक जामनगर एयरबेस के एयर ट्रैफिक कंट्रोल और रन-वे पर निगरानी के लिए मौजूद रहे। अवनी को चेस, टेबल टेनिस खेलने के अलावा स्केचिंग और पेंटिंग करना पसंद है।

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अफगानिस्तान में हुए आतंकी हमलों में खत्म हो गया भारत का प्यारा ‘काबुलीवाला’

नई दिल्‍ली [कमल कान्त वर्मा]। एक था काबुलीवाला लेकिन नहीं पता अब वो जिंदा भी है या नहीं। काबुलीवाला, वर्षों पहले जिस किरदार को पन्‍नों पर गुरुदेव रबिंद्रनाथ टैगोर ने सजीव किया था उसके आज जिंदा होने के सुबूत काफी कम हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि जिस काबुल और काबुलीवाले की छवि को टैगोर ने कागज पर उकेरा था, वह अब बिल्‍कुल बदल चुका है। अब वहां पर खुशहाली बामुश्‍किल ही नजर आती है। वह काबुल और वह अफगानिस्‍तान आज कितना बदल चुका है। जहां की हवाओं में कभी संगीत और प्‍यार बसता था वहां की हवाओं में अब बारूद की गंध और फिजाओं में धमाकों की आवाज बसी है।

आतंकी हमले की गूंज

कोई नहीं जानता है कि उसके सामने कब मौत खड़ी हो जाए। शुक्रवार रात को भी वहां पर ऐसे ही एक आतंकी हमले की गूंज फिर सुनाई दी। यह हमला तालिबान ने शाह-ए-बला कंस्‍क स्थित आर्मी के बेस कैंप पर किया था। इसमें अफगान आर्मी के बीस जवान मारे गए हैं। फराह की प्रां‍तीय काउंसिल के अधिकारी ने बताया है कि हमलावरों के पास भारी मात्रा में हथियार और गोलाबारूद था। इस दौरान मोर्चा संभालने वाले जवानों ने करीब 12 तालिबानियों को भी ढ़ेर कर दिया। शनिवार दोपहर तक भी यह मुठभेड़ जारी थी। यह महज सिर्फ कोई कहानी या किस्‍सा नहीं है बल्कि मौजूदा अफगानिस्‍तान की ऐसी ही कुछ स्थिति पिछले चार दशकों में हो गई है।

भारत के बेहद करीब है अफगानिस्‍तान

काबुल को भारत और यहां के लोग हमेशा से ही अपने बेहद करीब मानते आए हैं। काबुल एक ऐसी जगह है जहां पर आज भी भारत और यहां के लोगों को इज्‍जत और सम्‍मान से देखा जाता है। यहां पर आपको लगभग हर जगह भारत की छाप भी दिखाई दे जाती है, फिर चाहे वह अफगानिस्‍तान की नई पार्लियामेंट हो या सलमा डैम या फिर कोई दूसरी जगह। अफगानिस्‍तान की नई पार्लियामेंट को भारत ने ही बनवाया है। यह दोनों देशों की वर्षों की दोस्‍ती की एक जीती जागती मिसाल है। काबुल में ही एक जगह अफगानिस्‍तान का सबसे ऊंचा और बड़ा झंडा भी भारत से दोस्‍ती की कहानी बयां करता है। इस झंडे को उद्योगपति नवीन जिंदल के फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने अफगानिस्‍तान को बतौर तौहफा दिया था।

अफगानिस्‍तान में बॉलीवुड गॉसिप

इतना ही नहीं अफगानिस्तान टाइम्‍स बॉलीवुड के गॉसिप से भरा हुआ दिखाई देता है। काबुल का इंदिरागांधी अस्‍पताल यहां का सबसे पुराना अस्‍पताल है जहां के डॉक्‍टर कुछ दशकों से ज्‍यादा बिजी दिखाई देते हैं। इसको 1990 में बनवाया गया था, लेकिन यहां होने वाले धमाकों से यह भी अछूता नहीं रहा। वर्ष 2004 में इसको दोबारा बनवाया गया। भारत को लेकर यहां के लोगों का प्रेम साफतौर पर दिखाई भी देता है। कभी यदि आपका जाना यहां हो तो एक बार बाग ए बाबर भी जरूर जाइएगा, यहां से खूबसुरत काबुल आज भी बांहें फैलाए आपको बुलाता दिखाई देगा। बाग ए बाबर दरअसल मुगल बादशाह बाबर का म्‍यूजियम है। यहां पर आपको पाकिस्‍तान और भारत के बीच का फासला भी साफ दिखाई दे जाएगा। हिंदुस्‍तान का बताने के साथ ही यहां पर आपको हर कोई गले लगाने को तैयार रहता है वहीं पाकिस्‍तान को लेकर यहां लोगों के चेहरों पर मायूसी और गुस्‍सा दिखाई देता है।

अफगानिस्‍तान के खराब हालात के लिए पाक जिम्‍मेदार

ऐसा इसलिए है क्‍योंकि यहां के बिगड़े हालात के लिए अफगानिस्‍तान में आम आदमी से से लेकर यहां के राष्‍ट्रपति तक पाकिस्‍तान को दोषी मानते हैं। उनकी निगाह में पाकिस्‍तान ने अफगानिस्‍तान को बर्बाद कर दिया है। यह इसलिए भी सच लगता है क्‍योंकि इसकी भविष्‍यवाणी कहीं न कहीं फ्रंटियार गांधी या फिर खान अब्‍दुल गफ्फार खान ने काफी पहले ही कर दी थी। खान अब्दुल गफ्फार खान हिंदुस्‍तान के बंटवारे के बिल्कुल खिलाफ थे। उन्होंने ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के अलग पाकिस्तान की मांग का विरोध किया था और जब कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की मांग को स्वीकार कर लिया तो इस फ्रंटियर गांधी ने दुख में कहा था – ‘आपने तो हमें भेड़ियों के सामने फेंक दिया है।’

अलग पश्‍तूनिस्‍तान की मांग

जून 1947 में खान साहब और उनका खुदाई खिदमतगार एक बन्नू रेजोल्यूशन लेकर आया, जिसमें मांग की गई कि पाकिस्तान के साथ मिलाए जाने की बजाय पश्तूनों के लिए अलग देश पश्तूनिस्तान बनाया जाए। हालांकि अंग्रेजों ने उनकी इस मांग को खारिज कर दिया। अपने पूरे जीवन काल में वह कई बार गिरफ्तार किए गए और जेल में प्रताड़ना सहनी पड़ी। 20 जनवरी 1988 में जब उनका निधन हुआ उस समय भी वह पेशावर में हाउस अरेस्ट थे। उनकी इच्छा के अनुसार मृत्यु के बाद उन्हें अफगानिस्तान के जलालाबाद में दफनाया गया।

खत्‍म हो गया काबुलीवाला

खैर हम बात कर रहे थे काबुल और काबुलीवाले की। आज के काबुल में काबुलीवाले की छाप कुछ कम ही है। आज सड़कों पर या अफगानिस्‍तान के दूर-दराज इलाकों में बंदूक टांगे लोग ज्‍यादा दिखाई देते हैं। जिस काबुल को कभी भारत में काजू, बादाम और चिलगोजे के लिए जाना जाता था उसी काबुल को अब हथियारों और धमाकों वाली जगहों के रूप में जाना जा रहा है। यह वास्‍तव में बहुत बुरा है। आपको जानकर हैरत होगी कि इसी काबुल में हिंदी फिल्मों के गाने वाले इन्‍हें गुनगुनाने वाले आज भी सैकड़ों मिल जाते हैं। काबुल में करीब चालीस देशों के लोग रहते हैं। इन सभी के बीच भारत का नागरिक होने का मतलब यहां पर आपके लिए प्‍यार हर जगह है। शायद यही है आज का ‘काबुलीवाला’।

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न्युटन ईन यू पुस्तक का हुआ विमचोन ।

बिहटा के स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम में न्यूटन ईन यू पुस्तक का विमोचन किया गया । मौके पर माउंट लिट्रा के चेयरमैन नविन कुमार , बिहार ईनोवेशन काउंसिल के सदस्य संजिव श्रिवातस्व , ईनजिनियर विमल कुमार मनोज व युवा लेखक लवकुश , मोटिवेशनल स्पिकर राकेश शांडिल्य , कुमार गौरव , देशराज व विरू उपस्थित थे ।पुस्तक विज्ञान को स्कुली बच्चो के बिच में लोकप्रिय बनाने के लक्ष्य से लिखा गया ।
पुस्तक मे रोचक वैज्ञानिक किस्से मजेदार प्रयोग व आम जिवन के पिछे के विज्ञान को बखुबी समझाया गया है ।
ईस मौके पर साईंस फेस्टिवल का भी आयोजन किया गया जिसमें अनेको विधालय के बच्चो अलग अलग साईंस प्रोजेक्ट व मोडेल बनाया ।क्रार्यक्रम के संबोधन में सभी आगत अतिथियों ने ईस आयोजन की एक सुर में सराहना की ।

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दो बेटों का गला काट, खुद भी मरना चाहती थी महिला, एक बेटे की मौत

आरा. बिहार के भोजपुर जिले में एक मां ने अपने दो बेटों का गला काट दिया। उसने पहले चार साल के बेटे रूद्र का गला काटा फिर डेढ़ साल के बेटे बाबू के गले पर धारदार हथियार से वार किया। दोनों बेटों पर जानलेवा हमला करने के बाद महिला ने अपना गला भी काट लिया। रूद्र की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, गंभीर रूप से घायल महिला ज्योति देवी और उसके बेटे बाबू को इलाज के लिए सदर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है।

रूम बंद कर काट दिया बेटे का गला
घटना गुरुवार दोपहर की है। सिन्हा थाना क्षेत्र के बड़हरा प्रखंड के सिन्हा गांव के कुणाल सिंह की पत्नी ज्योति देवी घरेलू कलह से परेशान थी। पति से झगड़ा होने पर उसने अपने रूम का गेट बंद कर लिया और बेटों समेत खुद की जान देने की कोशिश की। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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अवैध संबंध के चलते होता था झगड़ा
ज्योति के पिता भरत सिंह ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की हत्या की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि मेरी बेटी ऐसा नहीं कर सकती। मेरे दामाद का किसी दूसरी महिला से अवैध संबंध था, जिसके चलते घर में आए दिन झगड़ा होता था। ससुराल वाले मेरे दामाद की शादी किसी दूसरी महिला के साथ करना चाहते थे।

दो बेटों का गला काट, खुद भी मरना चाहती थी महिला, एक बेटे की मौत