स्वच्छता सम्मेलन में PM मोदी बोले- सरकारी दफ्तरों में अब बाबूगीरी नहीं, सिर्फ गांधीगीरी

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर देश के कई हिस्सों में स्वच्छता को लेकर कार्यक्रम किया जा रहा है.

गांधी जयंती के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में अंतरराष्ट्रीय स्वच्छता सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस दौरान कई देशों के प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल रहे. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एनटोनियो गुतारेस इस कार्यक्रम में शामिल हुए, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यहां पर महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी प्रदर्शनी भी देखी.

यहां कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर दुनिया के कई देश आज यहां पर एक साथ हैं. स्वच्छता के मुद्दे पर कई देशों का एक साथ आना एक बड़ी घटना है. उन्होंने कहा कि आज गांधी के जन्मदिवस के 150वें वर्ष में कदम रख रहे हैं. PM बोले कि आज स्वच्छता के काम को लेकर सरकारी दफ्तरों में अब बाबूगीरी नहीं सिर्फ गांधीगीरी चलती है.

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प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हम महात्मा गांधी के सपनों को पूरा करने में जुटे हैं. गांधी ने कहा था कि वह स्वतंत्रता और स्वच्छता में से पहले स्वच्छता को प्राथमिकता देते हैं. उन्होंने 1945 में ग्रामीण स्वच्छता के बारे में लिखा भी था.

PM मोदी बोले कि गांधी सिर्फ गंदगी से बीमारियों के कारण ही स्वच्छता पर ही जोर नहीं देते थे, बल्कि जब हम गंदगी को दूर नहीं करते हैं तो वही अस्वच्छता हमारे अंदर आ जाती है ये परिस्थिति को स्वीकारने का कारण बन जाती है.

उन्होंने कहा कि अगर कोई जगह गंदी है और उसमें कोई बदलाव नहीं होता है, तो फिर वह व्यक्ति उस गंदगी को स्वीकार करने लगता है थोड़े समय बाद उसे गंदगी लगती ही नहीं है. जबकि व्यक्ति गंदगी को स्वीकार नहीं करता और उसे दूर करने का प्रयास करता है तो वह परिस्थितियों से लड़ने की आदत रखता है.

PM मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज मैं दुनिया के सामने स्वीकारता हूं कि अगर हम गांधी के विचारों से परिचित ना होते तो शायद किसी सरकार के लिए ये कार्यक्रम प्राथमिकता नहीं बनता था.

PM बोले कि हमने 15 अगस्त को लाल किले से स्वच्छता के बारे में बात की. आज स्वच्छता अभियान दुनिया का सबसे बड़ा आंदोलन बन गया है. 2014 से पहले ग्रामीण स्वच्छता का दायरा 38 फीसदी था वो आज 94 प्रतिशत हो गया है.भारत में खुले में शौच से मुक्त गांवों की संख्या आज 5 लाख से ज्यादा है, भारत के 25 राज्य खुद को खुले में शौच से मुक्त कह चुके हैं. 4 साल पहले खुले में शौच में शौच करने वाली वैश्विक आबादी का 60 फीसदी हिस्सा भारत में था, आज ये 20 फीसदी पर आ गया है.

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PM ने दावा किया कि जितने शौचालय बने हैं उसमें 90 फीसदी से अधिक शौचालयों का प्रयोग हो रहा है. सरकार इसपर भी ध्यान रख रही है कि कहीं ग्रामीण क्षेत्र के लोग दोबारा उस दिशा में ना चले जाएं. जब मैं यहां आ रहा था तब मैंने गुतेरिस के साथ प्रदर्शनी देखी, जिसमें बताया गया कि सिंधु घाटी सभ्यता में टॉयलेट सीवेज की बेहतर व्यवस्था थी. संयुक्त राष्ट्र ने स्वच्छता से जुड़े कई लक्ष्यों की तारीख 2030 तक रखी है, लेकिन इस लक्ष्य को समय से पहले पूरा करेंगे.

प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर पर स्वच्छता के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए 4P का मंत्र भी दिया. उन्होंने कहा कि विश्व को स्वच्छ बनाने के लिए 4P आवश्यक हैं, इनमें Political Leadership, Public Funding, Partnerships, People’s participation शामिल हैं.कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी विश्व मानव थे, उनके लिए कहा गया था कि सदियों के बाद जब कोई देखेगा कि ऐसा कोई इंसान नहीं हो सकता है.

उन्होंने कहा कि मन में विचार था कि दुनिया के 150 देशों के गायक बापू का भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिये’, उसी रूप में प्रस्तुत करें. जिसके बाद सुषमा जी की टीम ने इसे अहमियत दी. आज सभी देशों के कलाकार गांधीमय हो चुके होंगे. कई भारतीयों को पता ही नहीं है कि ‘वैष्णव जन तो तेने कहिये’ की असली भाषा क्या है.

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